karak in hindi कारक हिंदी में


karak in hindi कारक हिंदी में

1. कर्ता कारक –
परिमाण के अर्थ में
(द्रव्य वाचक – जाति वाचक संज्ञा)
सम्बोधन के अर्थ में।
उदाहरण –
उसने ढेरों जलेबियां खाई।
उसने पाँच लीटर दूध पीया।
हे राम पढ़ो।
2. कर्म कारक (को) 26 शब्द
1. दुहने में – गाय को दुहता है।
2. मागने में – धन मांगना।
3. पकाने में – चावल पकाता है।
4. दण्ड देने में – चोर को दण्ड देता है।
5. रोकने में – मार्ग रोकता है।
6. पुछनें में – मार्ग पुछना।
7. चुनने में – पुष्प् चुनता है।
8. बोलने में – सत्य बोलता है।
9. शासन करनें में – प्रजा पर शासन करता है।
10. ज्ीतने में – युद्ध जीतता है।

11. मथने में – दही मथता है।
12. चुराने में – धन चुराता है।
13. ले जाने में – भार ले जाता है।
14. हरण करने में – सीता का हरण करता है।
15. खोदने में – कुआ खोदता है।
16. ढोने में – भार ढोता है।
17. दोनों ओर – दोनों ओर पेड़ है।
18. चारों ओर – चारों और छात्र है।
19. समीप – घर के समीप पेड़ है।
20. निकट – घर के निकट जंगल है।

21. धिक्कार में – दुर्जन को धिक्कार है।
22. सभी ओर – सभी ओर वायुमंडल है।
23. ऊपर – 2 – जगत के ऊपर ऊपर आकाष है।
24. नीचे नीचे – आकाष के नीचे नीचे जगत है।
25. बीच में – गांव के बीच में कुआं है।
26. की ओर – वह दक्षीण की ओर जा रहा है।

3. करण कारक –
=> अंग विकार के योग में ।
उदाहरण –
वह सिर से गंजा है।
वह पैर से लगड़ा है।
वह आंख से काना है।
वह मस्तिष्क से अपंग है।
वह कान से बहरा है।

=> 2. साथ के योग में ।
उदाहरण –
वह राम के साथ गया।
वह बस के साथ दौड़ा।
वह घोड़ा के साथ दौड़ा।

=>  3. सहायता ली जाए।
वह बस से विद्यालय जाता है।
उसकी चाकू से अगंुली कट गई।

=> 4. भूत काल के लक्षणों से परिचय –
जटाओं वाला तपस्वी आया। हनुमान जी की वेषभूषा में आया।

=>  5. बिना के योग में – जल के बिना जीवन नहीं ।

4. सम्प्रादन कारक –
=> नमस्कार या प्रणाम के योग में
दादा जी को नमस्कार।
पापा को प्रणाम।

=>  आर्षीवाद के योग में
पास हो जाओ।
खुष रहो, सफल हो जाओं।

=>  बस के योग में

बस ! झगड़ो मत।
बस ! जाओ मत।

=>  दान देने के योग में
माँ ने भिखारी को भिक्षा दी।

=>  देने के योग में
चन्द्रकला ने रेणु को पुस्तक दी
राम ने श्याम को मोटर साइकिल दिया।

=> रूची के योग में
रेणु को जलेबी भाती है।
मुझे घुमना रूचीकर लगता है।

5. अपादान कारक
=> जिस वाक्य में डर, भय, क्रोध,घृणा,पाप, ईष्र्या, लज्जा इत्यादि शब्द आते है तो अपादान कारक होगा।
पण्डित जी कुत्ते से डरतें है।

=> अलग होने के भाव में
फल से रस टपकता है।
पेड़ से पता गिरा।
छत से कबुतर गिरा।
वह घोड़े से गिरा।
वह गाँव से जयपुर गया।

=> प्रकट होनें मे
हिमालय से गंगा निकलती है।
धरती से सोना निकला।

 

6. सम्बन्ध कारक –
=> स्मरण के अर्थ में
=> याद करने के अर्थ में – वह माता को याद करता है।

7. अधिकरण कारक –
=> आधार के रूप में
तोता डाली पर बैठा है।
मोहन छत पर बैठा है।
पुस्तक मेज पर रखी हुई है।

=> तुलना के आधार में
सोना चाँदी से महंगा है।
मोहन सोहन से सुन्दर है।
जयपुर हनुमानगढ़ से महगां है।

=> सर्वश्रेष्ठ सुनने में
भारत विष्व मे महान है।

8. सम्बोधन कारक – (!) होता है।
कारक चिन्ह – हे, हो, हरे, ।

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