हनुमानगढ़ जिला Hanumangarh District


हनुमानगढ़ जिला Hanumangarh District

  • 12 जुलाई 1994 को श्रीगंगानगर से पृथक होकर हनुमानगढ़ जिला बना।

  • हनुमानगढ़ राज्य का 31वां जिला बना ।

  • हनुमानगढ़ घग्घर (hakra In Pakistan)नदी के किनारे बसा हुआ है।
  • हनुमानगढ़ आरटीओ कोड है – RJ  31

कालीबंगा सभ्यता – यहां सरस्वती व दृषद्धती नदियों की घाटियों में हड़प्पा कालीन विकसित सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए। इस स्थल की खोज 1952 ई. में ए. घोष ने तथा इसका उत्खनन 1961 ई. में बी.बी. लाल तथा बी.के. थापर ने करवाया। कार्बन-14 पद्धति के अनुसार कालीबंगा की तिथ 2300 ई. पूर्व मानी गई है। इस स्थल पर जुते हुए खेत के अवशेष मिले हैं। कमरों के ऊपर की ओर छेद किए हुए किवाड़ व मुदा्र पर व्याघ का अंकन एकमात्र इसी स्थल पर मिला है। यहां प्राप्त सिन्धु घाटी पुरावशेषों के संरक्षण हेतु एक संग्रहालय की स्थापना की गई है। यह सभ्यता हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे प्राप्त हुई है। यहां से कपास की खेती के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। सिंधु सभ्यता का एकमात्र स्थल है। जहां मातृ देवी की मूर्तियां प्राप्त नहीं हुई हैं।

भटनेर दुर्ग – घग्घर नदी के तट पर 52 बीघा भूमि पर निर्मित भटनेर दुर्ग असंख्य बुर्जियां एवं 6380 कंगूरों के कारण भारतीय इतिहास में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। इसका निर्माण श्रीकृष्ण की 90वीं पीढ़ी में जन्में जैसलमेर के भाटी राजा के पुत्र भूपत ने अपने पिता की स्मृति में 258 ई. में करवाया था। हनुमानगढ़ में स्थित दुर्ग के बारे में 1398 ई. में

तैमूरलंग ने अपने आक्रमण के समय में इस दुर्ग के बारे में कहा था – कि ‘‘मैंने सम्पूर्ण उत्तर भारत में इतना सुद्ढ़ किला नहीं देखा।’’

भटनेर में कालांतर में कुतुबुद्दीन ऐबक, तैमूर व अकबर का भी अधिपत्य रहा है। बीकानेर के शासक सूरतसिंह ने भाटियों को हराकर पुनः भटनेर पर 1805 में अपना अधिपत्य कायम किया और इस दिन मंगलवार था। अतः इस किले का नाम हनुमानजी के नाम पर हनुमानगढ़ रख दिया। वर्तमान में यह धान्वन दुर्ग भग्न व जर्ज अवस्था में है।
छाटू राम स्मारक संग्रहालय संगरिया (हनुमानगढ़) में स्थित है।

आपणी योजना – जर्मनी सरकार की सहायता से निर्मित इस सिंचाई परियोजना से चूरू झुन्झुनू के साथ हनुमानगढ़ जिला भी लाभान्वित होगा।

 

गोगामेड़ी – हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में गोगामेड़ी नामक स्थान पर राजस्थान के लोक देवता गोगाजी का पूजा स्थल है। यहा इनके मस्जिदनुमा मंदिर का निर्माण फिरोजशाह तुगलक द्वारा करवाया गया, जिसे वर्तमान स्वरूप महाराजा गंगासिंह जी ने दिया। गोगामेड़ी की बनावट मकबरानुमा है तथा इसके ‘बिस्मिल्लाह’ अंकित है। भद्रपद बदी 1 से भ्रदपद सुदी 11 तक यहां विशाल मेला लगता हे। गोगाजी की समाधि की पूजा चायल जाति के मुसलमान करते हैं।

भद्रकाली मेला – हनुमानगढ़ से 7 किमी दूर स्थित भद्र काली के ऐतिहासिक मंदिर का प्रतिवर्ष चैत्र सुदी अष्टमी व नवमी को विशाल मेला भरता है। इस मंदिर की स्थापना बीकानेर के 6वें महाराज रामसिंह द्वारा अकबर के कहने पर की गई।
हनुमानगढ़ घग्घर नदी के किनारे स्थित है।

पल्लू मेला – गांव पल्लू में लगने वाले इस मेले में माता ब्रम्हाणी के मंदिर पर प्रत्येक माह की शुक्ला अष्टमी को विशेष पूजा हेतु दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

सिद्धमुख नहर परियोजना –  यूरोपियन आर्थिक समुदाय के सहयोग से स्थापित सिद्धमुख नहर परियोजना (नया नाम राजीवगांधी नहर परियोजना) का लाभ हनुमानगढ़ जिले की भादरा व नोहर तहसीलों को हो रहा है।

सेम समस्या :- सेम प्रभावित क्षेत्रों में नीदरलैंड के आर्थिक सहयोग से ‘‘इंडो डच जल निकासी परियोजना’’ क्रियान्वित किया गया था।

और हाल ही में हनुमानगढ़ से विधायक डॉक्टर रामप्रताप जी राजस्थान सरकार में जल संसाधन मंत्री है

  • राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले में सर्वाधिक खच्चर पाए जाते हैं।
  • इस प्रदेश की एकमात्र घग्घर नदी हैं जिसे नाली अथवा मृत नदी भी कहते है।
  • हनुमानगढ़ जिला पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों के साथ सीमा बनाता है।
  • हनुमानगढ़ जिले में उत्पादन की दृष्टि से सर्वाधिक चावल होते हैं।
  • सर्वाधिक खेल का सामान हनुमानगढ़ में बनाया जाता है।

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