मौलिक अधिकार | Fundamental Rights


मौलिक अधिकार | Fundamental Rights

मूल संविधान में मौलिक अधिकारों की संस्था 7 थी परन्तु 44वें संविधान संसोधन 1978 के द्वारा सम्पत्ति के मूल अधिकार को सामान्य कानून अधिकार बना दिया गया तथा वर्तमान में मूल अधिकारी की संख्या 6 है।

1.    समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
2.    स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
3.    शोषण के विरूद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
4.    धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
5.    संस्कृति व शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
6.    संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)

1. समानता का अधिकार:-

अनुच्छेद 14 – कानून के समक्ष समानता (गे्रट ब्रिटेन से)
अनुच्छेद 15 – सामाजिक समानता
अनुच्छेद 16 – सरकारी नौकरियों में अवसर की समानता
अनुच्छेद 17 – अस्पृष्यता का अंत
अनुच्छेद 18 – उपाधियों का अंत/वर्तमान में दो जगह –     शिक्षा व सेना।
भारत के विभिन्न पुरस्कार अनुच्छेद 18 में दिये जाते हैं।

2. स्वतंत्रता का अधिकार:-

अनुच्छेद 19 – विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 20 – कोई भी व्यक्ति कानून का उल्लंघन न करे तो     उसे दंडित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 21- जीवन संरक्षण या शारीरिक संरक्षण का अधिकार
अनु. 20 व 21 ऐसे अधिकार हैं जो आपातकाल की स्थिति में भी भंग नहीं होते।
अनुच्छेद 22 –    बन्दी प्रत्यक्षीकरण का अधिकार।
इस अधिकार के तहत व्यक्ति बंदी बनाने का कारण पूछसकता है।

3.शोषण के विरूद्ध अधिकार:- (23-24)

अनुच्छेद -23 मनुष्य के विक्रय पर रोक
अनुच्छेद – 24 इस अधिकार के तहत 14 वर्ष से कम आयु के     बालकों को कारखानों व खतरनाक नौकरियों में     नहीं रखा जा सकता है।

4. अनुच्छेद – 25 से 28 धार्मिक स्वतंत्रता

5.अनुच्छेद 29-30 शिक्षा की स्वतंत्रता

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार:- (32)

डाॅ. भीमराव अम्बेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान का ह्रदय व आत्मा कहा तथा संवैधानिक उपचारों के तहत व्यक्ति शोषण व अत्याचारों के विरूद्ध उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय की शरण में जा सकता है।

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